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03

Secrets Behind the King

  • 20 Feb, 2026

Raat ke 3 baje.

Malhotra Mansion so raha tha…

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  • 💫💫सपनों का बोझ💫💫💫💫सपनों का बोझ💫💫

    💫💫सपनों का बोझ💫💫

    बारिश की बूंदें उस रात कुछ ज़्यादा ही भारी थीं। जैसे आसमान भी किसी का दर्द अपने अंदर समेटे रो रहा हो। रात के लगभग साढ़े दस बजे होंगे। लखनऊ की सुनसान सड़क पर पीली स्ट्रीट लाइट की धुंधली रोशनी में एक पतली-सी लड़की भीगती हुई चली जा रही थी। उसके हाथ में कोई छाता नहीं था। शायद वह बारिश से बचना ही नहीं चाहती थी। उसकी आंखों से गिरते आँसू और आसमान से गिरती बारिश की बूंदों में फर्क करना मुश्किल था। उसका नाम था — आयत। आज उसके घर में फिर वही हुआ था जो अक्सर होता था — सपनों की बात आते ही जिम्मेदारियों का पहाड़ उसके सामने खड़ा कर दिया गया। --- 🌧 एक टूटा हुआ सपना “आयत, ये कॉलेज-वालिज की बातें छोड़ो। घर की हालत देखो।” पिता की आवाज़ में कठोरता थी, लेकिन थकान उससे भी ज्यादा। आयत ने हिम्मत करके कहा था, “अब्बू… मुझे बस एक मौका चाहिए। मैं स्कॉलरशिप पर पढ़ लूंगी। आप पर बोझ नहीं बनूंगी।” “बोझ?” पिता ने हल्की हंसी में कड़वाहट घोलते हुए कहा, “बेटी, हमारे यहां बेटियाँ पढ़कर नौकरी नहीं करतीं। शादी होती है उनकी।” वह पल… उसके दिल के अंदर जैसे किसी ने खंजर उतार दिया हो। आयत को लगा था कि उसके अपने ही लोग उसके सपनों को समझेंगे। लेकिन हर बार वही बात — “घर की इज्जत”, “समाज क्या कहेगा”, “छोटी बहन की शादी”। उसकी पढ़ाई, उसकी मेहनत, उसके टॉप किए हुए रिजल्ट… सब जैसे किसी को दिखते ही नहीं थे। --- 🌙 वह पहली रात जब उसने खुद से सवाल किया बारिश में भीगते हुए वह शहर के पुराने पुल पर जाकर रुक गई। नीचे बहती गोमती नदी की लहरें अंधेरे में चमक रही थीं। उसने रेलिंग पकड़ी… एक पल के लिए उसके मन में ख्याल आया — “अगर मैं कूद जाऊं तो… सब खत्म हो जाएगा।” लेकिन अगले ही पल उसे अपनी अम्मी का चेहरा याद आया। वो कमजोर हाथ… जो हर रात उसके सिर पर दुआ रख देते थे। “या अल्लाह… अगर मेरे सपने गलत हैं तो मुझे हिम्मत दे उन्हें छोड़ने की। और अगर सही हैं… तो रास्ता दिखा दे।” उसकी आवाज़ बारिश में घुल गई। --- 🚗 एक अनजान मुलाकात तभी पीछे से एक गाड़ी आकर रुकी। ब्लैक कार… जिसकी हेडलाइट्स ने उसके भीगे चेहरे को रोशन कर दिया। दरवाज़ा खुला। एक लंबा-सा लड़का, काले कोट में, भीगती सड़क पर कदम रखते हुए उसकी तरफ बढ़ा। “इतनी रात में… यहां अकेली?” उसकी आवाज़ में ठंडापन था, मगर आँखों में अजीब-सी बेचैनी। आयत ने पलटकर देखा। उसकी नज़रें उस अनजान लड़के की गहरी आंखों से टकराईं। “आपको क्या?” उसने रूखेपन से कहा। लड़का कुछ सेकंड उसे देखता रहा। फिर बोला, “मरने का इरादा है… या सिर्फ ड्रामा?” उसके शब्द तीर की तरह लगे। “आप कौन होते हैं पूछने वाले?” आयत की आवाज़ कांप रही थी। वह लड़का उसके बिल्कुल करीब आ गया। “कोई नहीं। लेकिन अगर तुमने कुछ गलत कदम उठाया… तो पुलिस केस होगा। और मुझे गवाही देनी पड़ेगी कि मैंने तुम्हें यहां देखा था। तो हां… थोड़ा-सा मतलब बनता है।” आयत को गुस्सा आया… लेकिन पता नहीं क्यों, उस अजनबी की मौजूदगी ने उसके मन के अंधेरे को थोड़ा-सा रोक लिया। “नाम क्या है तुम्हारा?” उसने पूछा। “क्यों बताऊं?” लड़का हल्का-सा मुस्कुराया। “ठीक है… मत बताओ। लेकिन एक बात याद रखना — सपनों से भागकर नदी में कूदने से सपने मरते नहीं। वो बस अधूरे रह जाते हैं… और अधूरे सपने बहुत दर्द देते हैं।” आयत ने पहली बार उसकी आंखों में गौर से देखा। वह आंखें… जैसे बहुत कुछ झेल चुकी हों। “आपको क्या पता मेरे सपनों के बारे में?” “मुझे कुछ नहीं पता,” उसने धीमे से कहा। “लेकिन ये जरूर जानता हूं कि इतनी खूबसूरत आंखों में हार मानने की हिम्मत नहीं होनी चाहिए।” उसकी बात सुनकर आयत का दिल अजीब-सी धड़कन से भर गया। --- 🌌 एक छोटी-सी उम्मीद “घर कहां है तुम्हारा?” उसने पूछा। आयत चुप रही। “बैठो गाड़ी में। छोड़ देता हूं। वैसे भी ये बारिश तुम्हें बीमार कर देगी।” आयत ने एक पल सोचा। फिर जाने क्यों, उस अजनबी पर भरोसा कर लिया। गाड़ी के अंदर हल्की-सी खुशबू थी। वह खिड़की के बाहर गिरती बारिश को देखती रही। “वैसे… मेरा नाम आरिज़ है,” उसने कहा। आयत ने धीमे से जवाब दिया, “आयत।” “अच्छा नाम है,” आरिज़ ने मुस्कुराते हुए कहा। “मतलब पता है तुम्हें?” “हां… कुरान की आयत।” “तो फिर… खुदा की किताब की आयत होकर इतनी जल्दी हार मान जाओगी?” उसके शब्दों ने आयत के दिल में हल्की-सी रोशनी जगा दी। --- 🏠 घर की दहलीज गाड़ी उसके घर के सामने रुकी। “यहीं?” आरिज़ ने पूछा। “हां।” वह उतरने लगी तो उसने कहा, “आयत।” वह पलटी। “कल सुबह सूरज निकलेगा। देखना… शायद तुम्हारे लिए भी कुछ नया लेकर आए।” आयत ने कुछ नहीं कहा। बस हल्की-सी नजरों से उसे देखा… और घर के अंदर चली गई। दरवाज़ा बंद करते हुए उसने एक बार फिर बाहर झांका। ब्लैक कार जा चुकी थी। लेकिन उसके दिल में जो भारीपन था… वो थोड़ा-सा हल्का हो गया था। --- 💭 उस रात की आखिरी सोच अपने कमरे में जाकर वह बिस्तर पर बैठ गई। भीगे बालों से पानी टपक रहा था। आज पहली बार किसी अजनबी ने उसके सपनों को मरने से रोका था। “आरिज़…” उसने धीरे से नाम दोहराया। क्या वो सिर्फ एक राहगीर था? या उसकी जिंदगी में आने वाली किसी बड़ी कहानी की शुरुआत? आयत को नहीं पता था। लेकिन उस रात उसने खुद से एक वादा किया — “मैं अपने सपनों को बोझ नहीं बनने दूंगी।” खिड़की से आती हवा में बारिश की खुशबू थी। और उसके दिल में… एक नई उम्मीद। --- एपिसोड 1 समाप्त

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  • डील की शादीडील की शादी

    डील की शादी

    अध्याय १: सादगी का बोझ लखनऊ की संकरी गलियों में, जहाँ हवा में चाय की खुशबू और रिक्शों की घंटियाँ घुली रहती हैं, वहाँ रहती थी आरही। एक साधारण मध्यमवर्गीय लड़की, जिसकी ज़िंदगी किताबों, कॉलेज और परिवार की छोटी-छोटी खुशियों में सिमटी हुई थी। उसके पिता, राजेश शर्मा, एक छोटे से किराने की दुकान चलाते थे। माँ, सरिता, घर संभालतीं और छोटा भाई, अक्षय, स्कूल में पढ़ता था। लेकिन ये सादगी का मुखौटा था। असल में, उनके परिवार पर करोड़ों का कर्ज था – एक पुराना निवेश जो गलत हाथों में पड़ गया था। बैंक वाले रोज दरवाज़े पर दस्तक देते, और पिता की आँखों में वो डर छिपा रहता जो आरही को रातों में जगा देता। आरही, २२ साल की, गोरी-चिट्टी, लंबे काले बालों वाली, हमेशा साड़ी या सलवार कमीज में। उसकी आँखें बड़ी-बड़ी, मासूम, लेकिन उनमें एक जिद थी। वो सोचती, "मैं कुछ करूँगी। परिवार को बचाऊँगी।" लेकिन कैसे? कॉलेज की पढ़ाई पूरी होने वाली थी, नौकरी की तलाश में थी, लेकिन कर्ज का बोझ इतना बड़ा था कि सारी उम्मीदें दब जातीं। एक शाम, जब सूरज डूब रहा था और शहर की लाइटें जल रही थीं, आरही घर लौटी। दरवाज़े पर दो काले सूट वाले आदमी खड़े थे। उनके चेहरे सख्त, आँखें ठंडी। "राजेश शर्मा घर पर हैं?" एक ने पूछा। आरही का दिल धड़क उठा। पिता अंदर थे, लेकिन वो बोली, "कौन हो आप? क्या काम है?" "ज़यान खान साहब ने भेजा है," दूसरे ने कहा, और आरही के चेहरे पर खून उतर गया। ज़यान खान – शहर का सबसे खतरनाक नाम। माफिया किंग, जो अंडरवर्ल्ड को अपनी मुट्ठी में रखता था। राजनीति से लेकर व्यापार तक, सब उसकी मर्ज़ी से चलता। सुना था, वो ठंडा, निर्दयी, और भावनाहीन है। उसके नाम से लोग काँपते थे। पिता बाहर आए, चेहरा पीला। "आरही, अंदर जा," उन्होंने कहा, लेकिन आरही नहीं हटी। वो आदमी बोले, "कर्ज का समय खत्म हो रहा है। एक हफ्ते में चुकाओ, वरना..." धमकी अधर में लटक गई। आरही ने पूछा, "कितना कर्ज है?" पिता ने नज़रें झुका लीं। "दो करोड़।" आरही स्तब्ध रह गई। दो करोड़? कैसे चुकाएँगे? रात भर वो सो नहीं सकी। अगले दिन, वो कॉलेज से लौट रही थी जब एक काली एसयूवी उसके सामने रुकी। दरवाज़ा खुला, और एक आदमी ने कहा, "ज़यान साहब मिलना चाहते हैं। चलो।" आरही का दिल जोर से धड़का। "क्यों? मैं नहीं जाऊँगी।" लेकिन आदमी ने कहा, "तुम्हारे परिवार के लिए अच्छा होगा।" मजबूरन वो बैठ गई। कार शहर से बाहर, एक लग्ज़री हवेली की ओर बढ़ी। हवेली पुरानी लेकिन आधुनिक – बड़े-बड़े गेट, सिक्योरिटी गार्ड्स, और चारों तरफ कैमरे। आरही को लगा, वो किसी जेल में घुस रही है। #### अध्याय २: ठंडी मुलाकात हवेली के अंदर, मार्बल फ्लोर, क्रिस्टल चैंडेलियर, और दीवारों पर महँगी पेंटिंग्स। लेकिन हवा में एक ठंडक थी, जैसे मौत की साँस। आरही को एक बड़े हॉल में ले जाया गया। वहाँ, सोफे पर बैठा था ज़यान खान। लंबा, चौड़ा कंधों वाला, काले सूट में। उसकी आँखें काली, ठंडी, जैसे कोई भावना न हो। दाढ़ी हल्की, चेहरा नुकीला, और होंठों पर एक क्रूर मुस्कान। उम्र करीब ३०। "बैठो," उसने कहा, आवाज़ गहरी, आदेश जैसी। आरही बैठ गई, हाथ काँप रहे थे। "तुम्हारे पिता पर दो करोड़ का कर्ज है। वो नहीं चुका सकते।" आरही ने साहस जुटाया। "हम कोशिश करेंगे। समय दो।" ज़यान हँसा, लेकिन वो हँसी ठंडी थी। "समय? मैं समय नहीं देता। मैं लेता हूँ। लेकिन एक डील है।" आरही की साँस रुक गई। "कैसी डील?" "मुझसे शादी करो। एक साल का कॉन्ट्रैक्ट। बदले में, कर्ज माफ़।" आरही के कान बजने लगे। "शादी? क्यों? आप जैसे आदमी को मेरी क्या ज़रूरत?" ज़यान की आँखें सिकुड़ीं। "मेरे कारण। मेरे दुश्मन हैं। एक स्टेबल इमेज चाहिए। तुम साधारण हो, परफेक्ट कवर। रूल्स: नो लव। नो अटैचमेंट। नो क्वेश्चन्स।" आरही का गुस्सा भड़क उठा। "मैं कोई चीज़ नहीं हूँ जो बेची जाए! मैं मना करती हूँ!" ज़यान उठा, उसके करीब आया। उसकी खुशबू – महँगा परफ्यूम मिश्रित तंबाकू – आरही को घेर लिया। "मना करने का मतलब? तुम्हारा परिवार सड़क पर। पिता जेल में। सोच लो।" आरही की आँखें भर आईं। परिवार की याद आई – माँ की मुस्कान, भाई का मासूम चेहरा। "ठीक है," वो फुसफुसाई। "लेकिन सिर्फ एक साल।" ज़यान मुस्कुराया। "गुड गर्ल। कल शादी।" आरही घर लौटी, दिल टूटा हुआ। पिता को बताया, वो रो पड़े। "बेटी, मैंने तुम्हें बर्बाद कर दिया।" लेकिन आरही बोली, "नहीं पापा। मैं बचाऊँगी हमें।" #### अध्याय ३: कॉन्ट्रैक्ट की रस्में अगले दिन, हवेली में शादी हुई। सादा, बिना किसी रस्म के। सिर्फ कागज़ पर साइन। आरही ने लाल जोड़ा पहना, लेकिन उसका चेहरा उदास। ज़यान ने सूट में, बिना भाव के। मौलवी ने निकाह पढ़ाया। "कबूल है?" ज़यान ने कहा, "कबूल है।" आरही की आवाज़ काँपी, "कबूल है।" शादी के बाद, ज़यान ने कहा, "अब तुम मेरी वाइफ हो। लेकिन याद रखो – रूल्स। तुम्हारा कमरा अलग। कोई इंटिमेसी नहीं, जब तक मैं न कहूँ।" आरही को एक बड़ा कमरा दिया गया – लग्ज़री बेड, वॉर्डरोब भरा हुआ महँगे कपड़ों से। लेकिन दीवारों पर छिपे कैमरे? उसे शक हुआ, लेकिन पूछा नहीं। रूल: नो क्वेश्चन्स। रात हुई। आरही अकेली, रो रही थी। बाहर से आवाज़ें आईं – ज़यान के आदमी मीटिंग कर रहे थे। वो चुपके से बाहर निकली, हवेली घूमी। एक दरवाज़ा मिला, जो地下 की ओर जाता था। वो खोलने ही वाली थी जब एक हाथ ने उसे पकड़ लिया। "कहाँ?" ज़यान की आवाज़। आरही घबराई। "बस... घूम रही थी।" ज़यान की पकड़ सख्त। "यहाँ मत आना। सीक्रेट रूम्स। डेंजरस।" आरही ने देखा, उसकी आँखों में एक फ्लैश – डर? नहीं, गुस्सा। वो चली गई, लेकिन मन में सवाल: क्या छिपा रहा है? #### अध्याय ४: पहली टकराव अगले दिन, आरही ब्रेकफास्ट टेबल पर। ज़यान सामने, कॉफी पीते हुए। "आज से तुम्हारी ज़िंदगी बदल गई। बाहर मत जाना बिना बताए।" आरही ने कहा, "मैं कैदी हूँ क्या? कॉलेज जाना है।" ज़यान की भौंहें चढ़ीं। "नो। अब तुम खान फैमिली की हो। डेंजरस वर्ल्ड।" आरही का गुस्सा फूटा। "ये अनफेयर है! मैंने शादी की परिवार के लिए, लेकिन अपनी ज़िंदगी नहीं बेची!" ज़यान उठा, टेबल पर हाथ मारा। "रूल्स फॉलो करो! या कंसेक्वेंस भुगतो।" आरही की आँखें डबडबाईं। "आप इंसान हैं या मशीन? कोई भावना नहीं?" ज़यान करीब आया, उसका चेहरा छूने को हाथ उठाया, लेकिन रुक गया। "भावनाएँ कमज़ोरी हैं। मैं कमज़ोर नहीं हूँ।" आरही चली गई, कमरे में। लेकिन बाहर, हवेली के गार्डन में एक औरत दिखी – खूबसूरत, लंबे बाल, रेड ड्रेस में। वो ज़यान से बात कर रही थी, हँस रही थी। आरही को जलन हुई? नहीं, उत्सुकता। कौन है वो? शाम को, ज़यान के फोन पर कॉल आया। "हाँ, डील फाइनल। लेकिन एनिमीज़ वॉचिंग।" आरही ने सुना, छिपकर। अंडरवर्ल्ड की बातें – पॉलिटिक्स, पावर। रात को, आरही सो रही थी जब दरवाज़ा खुला। ज़यान अंदर आया, शर्ट पर खून। "क्या हुआ?" आरही उठी। ज़यान ने देखा, "नो क्वेश्चन्स।" लेकिन आरही ने देखा, उसकी आर्म पर घाव। "ये... लाओ, पट्टी करूँ।" ज़यान रुका, फिर बैठ गया। आरही ने पट्टी की, उनके स्पर्श में एक टेंशन। ज़यान की आँखें नरम हुईं, लेकिन जल्दी सख्त। "थैंक्स। लेकिन ये मत सोचना कुछ है।" आरही बोली, "आपके दिल में क्या है? क्यों इतने ठंडे?" ज़यान उठा। "पास्ट। जो तुम्हें नहीं जानना।" क्लिफहैंगर: जैसे ही ज़यान बाहर गया, आरही के फोन पर मैसेज आया – अननोन नंबर से: "ज़यान का राज जानना चाहती हो? मिलो कल। लेकिन सावधान, वो तुम्हें मार डालेगा।"

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